प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी: शहरी (पीएमएवाई-यू)

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (पीएमएवाई -यू): शहरी निवासियों के लिए आवास

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प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (पीएमएवाई -यू), भारत सरकार का एक प्रमुख मिशन है जिसे आवास और शहरी मामले (एमओएचयूए) मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, इसमें मलिन बस्तियों के निवासियों सहित ईडब्ल्यूएस /एलआईजी और एमआईजी वर्गों के बीच आवासों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2022 जबकि देश अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करेगा, तक सभी पात्र शहरी घरों को एक पक्का मकान प्रदान करने की गारंटी दी गई है। पीएमएवाई (यू) में मांग-प्रेरित विधि को अपनाया गया है जिसमें आवासों की कमी को राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों द्वारा मांग के मूल्यांकन के आधार पर निर्णीत किया जाएगा: राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियां (एसएलएनए), स्थानीय शहरी प्राधिकरण (यूएलबी) / क्रियान्वयन एजेंसियां (आईए), केंद्रीय नोडल एजेंसियां (सीएनए) और प्राथमिक ऋणदाता संस्थान (पीएलआई) प्रमुख हितधारक हैं जो पीएमएवाई (यू) के क्रियान्वयन और सफलता में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस मिशन में सभी नगरीय क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है जिनमें विधिक कस्बे, अधिसूचित नियोजित क्षेत्र, विकास प्राधिकरण, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, या राज्य के कानून के अंतर्गत ऐसे कोई अन्य प्राधिकरण शामिल हैं, जो महानगरीय व्यवस्था संबंधी घटकों और दिशानिर्देर्शों के साथ निर्भर हैं।

पीएमएवाई (यू) के अंतर्गत सभी मकानों में बुनियादी सुविधाएं जैसे कि शौचालय, जल आपूर्ति, बिजली, और किचन आदि होंगी। यह मिशन महिलाओं के नाम से या उनके संयुक्त स्वामित्व के प्रावधान के साथ महिला सशक्तिकरण में योगदान करता है। इसके अलावा, भिन्न सक्षम व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों, एकाकी महिलाओं, ट्रांससेक्सुअल, और समाज के अन्य अधिक असुरक्षित व कमज़ोर वर्गों के पक्ष में विशेष प्रावधान किए गए हैं। पीएमएवाई (यू) के अंतर्गत मकान, इस संसार में प्राप्तकर्ताओं का जीवनयापन सुखद बनाने की गारंटी के साथ उनको मकान मालिक होने का गौरवशाली अहसास भी प्रदान करता है।

पीएमएवाई (यू) में भौगोलिक दशाओं, भूविज्ञान, आर्थिक दशाओं, भूमि की अभिगम्यता, रूपरेखा व अन्य के आधार पर व्यक्तियों की आवश्यकताओं से अनुरूपता के लिए कैफैटेरिया का तरीका अपनाया गया है। इस योजना को आगे चार वर्गों में बांटा गया है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

स्व-स्थाने मलिन बस्ती पुनर्विकास (आईएसएसआर):

आईएसएसआर वर्ग के अंतर्गत मलिन बस्तियों के पात्र निवासियों के लिए निर्मित सभी मकानों के लिए प्रति मकान रू. 1 लाख की केंद्रीय सहायता अनुमन्य है, जिसमें निजी इंजीनियरों के निवेश के साथ भूमि को एक संसाधन के तौर पर उपयोग किया जाता है। पुनर्विकास के पश्चात, राज्यों/केंद्रशासित सरकारों द्वारा नियमों के अनुरूप मलिन बस्तियों का उद्धार किया जाना सूचित किया जाता है।

राज्यों/शहरों को, पुनर्विकसित की जा रही अन्य मलिन बस्तियों के लिए इस केंद्रीय सहायता को उपयोग करने की छूट दी गई है। परियोजनाओं को आर्थिक रूप से तर्कसंगत बनाने के लिए राज्यों/शहरों को अतिरिक्त एफएसआई/एफएआर या टीडीआर दिया जाता है। निजी स्वामित्व वाले भूमि पर मलिन बस्तियों के लिए, भूमि के स्वामियों हेतु व्यवस्था के अनुरूप राज्यों/शहरों को अतिरिक्त एफएसआई/एफएआर या टीडीआर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय सहायता स्वीकार्य नहीं है।

क्रडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस):

आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग (ईडब्ल्यूएस)/ निम्न आय समूह (एलआईजी), मध्यम आय समूह (एमआईजी)- I और मध्यम – आय समूह (एमआईजी)- II जो  नए विकास या मकान के संवर्धन * हेतु बैंकों, आवासीय वित्तपोषण कंपनियों, और ऐसे ही अन्य संस्थानों से आवास हेतु लोन लेना चाहते हों, वे क्रमशः रू. 6 लाख, रू. 9 लाख और रू. 12 लाख तक की अग्रिम राशि पर 6.5%, 4% और 3% प्रीमियम प्रायोजन हेतु पात्र होते हैं। लोन व्यवस्था के माध्यम से प्राप्तकर्ताओं को यह लाभ प्रदान करने और प्रगति की जांच करने के लिए मंत्रालय ने आवास और शहरी विकास निगम (एचयूडीसीओ), राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी), और भारतीय रिजर्व बैंक (एसबीआई) को केंद्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) के रूप में नामित किया है। एमआईजी वर्ग हेतु योजना को 31 मार्च 2021 तक विस्तारित किया गया है।

सीएलएसएस वर्टिकल के अंतर्गत चक्रों को सुगम बनाने के लिए सीएलएपी गेटवे योगदान करता है, जिसे शिकायतें कम करने की दिशा में मंत्रालय द्वारा समान रूप से प्रोत्साहन दिया गया है।

साझेदारी में किफायती आवास (एएचपी):

एएचपी के अंतर्गत, प्रति ईडब्ल्यूएस मकान रू. 1.5 लाख की केंद्रीय सहायता भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। एक तर्कसंगत आवासीय कार्य जो विविध वर्गों के लिए विविध प्रकार के आवासों का मिश्रण हो सकता है, वह भी केंद्रीय सहायता हेतु पात्र होता है यदि उपक्रम में कम से कम 35% मकान ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए हों। राज्य/केंद्रशासित क्षेत्रों को ईडब्ल्यूएस मकानों की लागत की ऊपरी सीमा निर्धारित करने की छूट दी गई है, ताकि उनको प्रस्तावित प्राप्तकर्ताओं के लिए तर्कसंगत और उपयुक्त बनाया जा सके। राज्यों और शहरी समुदायों द्वारा अतिरिक्त रूप से विभिन्न रियायतें दी जा सकती हैं, उदाहरण के लिए, उनका राज्य का अंश, उचित कीमतों पर भूमि, स्टाम्प शुल्कों से छूट, व अन्य।

लाभार्थी के नेतृत्व में व्यक्तिगत मकान निर्माण / संवर्धन (BLC-N/ BLC-E):

ईडब्ल्यूएस वर्ग वाले पात्र परिवारों को एक मकान विकसित करने /उन्नत बनाने के लिए प्रति ईडब्ल्यूएस मकान रू. 1.5 लाख की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। शहरी स्थानीय निकाय, उत्तरदायित्व और विभिन्न सूक्ष्म पहलू जैसे कि मौद्रिक स्थिति और पात्रताएं ज्ञात करने के लक्ष्य के साथ प्राप्तकर्ताओं के डाटा और निर्माण योजनाओं को अनुमोदित करते हैं। राज्यों/केंद्रशासित/यूएलबी के अंश के साथ, यदि कोई हो, केंद्रीय सहायता, राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों द्वारा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) (डीबीटी) के माध्यम से प्राप्तकर्ताओं के खातों में प्रेषित की जाती है।

भारत में पीएमएवाई -यू इकाइयों के मांग प्रेरक

पीएमएवाई -यू में सभी विगत महानगरीय आवास योजनाओं को सम्मिलित किया गया है और 2022 तक 20 मिलियन आवास कमी पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बिंदु तक 4,427 शहरी क्षेत्रों/कस्बों को पीएमएवाई -यू के अंतर्गत समाविष्ट कर लिया गया है। आवासीय वित्त पर ब्याज को हाल के दशक में विस्तारित किया गया है, जो सकारात्मक सामाजिकआर्थिक पहलुओं, विस्तृत होते शहरीकरण, अर्थव्यवस्था के विकास, आय में वृद्धि, परिवार इकाइयों की संख्या में वृद्धि, पहली बार घर खरीदने वालों की संख्या में वृद्धि और होम लोन्स की अपेक्षाकृत सरल सुलभता से प्रेरित है।

पीएमएवाई – यू के लिए आवश्यक दस्तावेज़

योजना के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय आपके लिए ये रिकार्ड रखना उपयोगी रहेगा।

  • पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, नागरिक आईडी)
  • पते का प्रमाण
  • आय की पुष्टि (फार्म 16, वित्तीय बैलेंस विवरण, सबसे हाल का आईटी रिटर्न)
  • खरीदी जाने वाली प्रापर्टी का मूल्यांकन पृष्ठांकन
  • एक अनुबंध, जिसमें यह उल्लेख किया गया हो कि आप या आपके रिश्तेदार का भारत में कोई भौतिक मकान अर्थात पक्का मकान नहीं है।
  • निर्माणकर्ता के साथ ढांचे के विकास का अनुबंध
  • ढांचा विकास की पृष्ठांकित योजना
  • किसी सक्षम प्राधिकारी या आवासीय सोसाइटी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र
  • संबंधित प्रापर्टी की दशा और प्रकृति की पुष्टि करने वाली रिपोर्ट
  • प्रापर्टी आवंटन पत्र
  • प्रापर्टी के अधिग्रहण के लिए अग्रिम दी गई किश्तों की रसीद, अगर लागू हो।
  • प्रापर्टी के कुछ अन्य दस्तावेज़, अगर आवश्यक हों।

पीएमएवाई -यू को प्रभावित करने वाली प्रमुख रूकावटें

  • महानगरीय क्षेत्रों में भूमि की सीमित उपलब्धता
  • इकाई की अधिक लागत, विशेषरूप से मुम्बई महापालिका क्षेत्र और दिल्ली में।
  • निजी विकासकर्ताओं द्वारा रूचि न लिया जाना
  • कच्चे माल/सामग्रियों की बढ़ती लागतें।
  • प्रचालन संबंधी कठिनाइयां, जो निर्धनों/वित्तीय रिकार्ड रहित, अनियमित और अनौपचारिक आय स्रोतों वाले व्यक्तियों को लाभ प्रदान करना, वित्तीय संस्थानों के लिए कठिन बना देती हैं।

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